भोपाल में 600 खतरनाक मकानों पर चलेगा बुलडोजर: नगर निगम का 13 नवंबर तक अल्टीमेटम, खाली नहीं किया तो होगी जबरन कार्रवाई
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भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में जर्जर और खतरनाक हो चुके मकानों के खिलाफ भोपाल नगर निगम (BMC) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। शहर में सर्वे के बाद चिन्हित किए गए 600 से अधिक खतरनाक मकानों को ढहाने के लिए नगर निगम ने 13 नवंबर तक का अंतिम अल्टीमेटम (नोटिस) जारी किया है। इसके बाद 14 नवंबर से शहर के अलग-अलग जोन में एक साथ बड़े स्तर पर बुलडोजर चलाकर इन जर्जर ढांचों को नेस्तनाबूद किया जाएगा।
निगम प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि मकान मालिकों या किरायेदारों ने तय समय सीमा के भीतर स्वेच्छा से इन जर्जर मकानों को खाली नहीं किया, तो निगम की टीम पुलिस बल के साथ मिलकर इन्हें जबरन खाली कराएगी और तोड़ने का खर्च भी मकान मालिकों से ही वसूला जाएगा।
पुराने शहर में सबसे ज्यादा संकट, हादसों को रोकने के लिए सख्त कदम
नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, मानसून के बाद और बदलते मौसम में जर्जर इमारतों के गिरने का खतरा काफी बढ़ जाता है। शहर में ऐसे कई रिहायशी और व्यावसायिक भवन हैं जो दशकों पुराने हैं और बेहद जर्जर हालत में हैं। इनमें से सबसे ज्यादा खतरनाक मकान पुराने भोपाल के इलाकों में चिन्हित किए गए हैं।
निगम कमिश्नर ने निर्देश जारी किए हैं कि किसी भी अप्रिय घटना या जनहानि को रोकने के लिए इन मकानों को जल्द से जल्द हटाना जरूरी है। पूर्व में भी कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद लोगों द्वारा मकान खाली न करने के कारण इस बार निगम प्रशासन सख्त रुख अपना रहा है।
जोन प्रभारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी
इस महा-अभियान को अंजाम देने के लिए भोपाल नगर निगम के सभी 21 जोन के प्रभारियों और भवन अधिकारियों (Building Officers) को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
• 13 नवंबर तक: सभी चिन्हित मकानों पर दोबारा अंतिम चेतावनी के नोटिस चस्पा किए जा रहे हैं।
• 14 नवंबर से: नगर निगम का अमला, पोकलेन, जेसीबी मशीनों और भारी पुलिस बल के साथ मैदान में उतरेगा।
मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर गौतम सिंह ने साफ कर दिया है कि 13 नवंबर तक इन खतरनाक और जर्जर मकानों को हर हाल में खाली करना होगा। प्रशासन का कहना है कि 14 नवंबर से भारी पुलिस बल के साथ यहाँ बुलडोजर की एंट्री होगी।
नोटिसों के बाद ऐशबाग की जनता सड़कों पर उतर आई है। जनसुनवाई में पहुंचे प्रभावित परिवारों का दर्द छलक उठा। रहवासियों का कहना है कि वे सालों से यहाँ रह रहे हैं, और अचानक बिना किसी विस्थापन या मुआवजे की ठोस व्यवस्था के उन्हें बेघर किया जा रहा है।
प्रशासन की इस एकतरफा कार्रवाई के विरोध में अब राजनेता भी कूद पड़े हैं। विपक्ष के नेताओं ने प्रभावित परिवारों के विस्थापन के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। नेताओं का सीधा आरोप है कि सरकार बिना कोई वैकल्पिक व्यवस्था किए गरीबों के आशियाने उजाड़ रही है।
एक तरफ प्रशासन सुरक्षा का हवाला देकर इन 600 जर्जर मकानों को ढहाने पर अड़ा है, तो दूसरी तरफ सैकड़ों जिंदगियां अपने भविष्य को लेकर अंधकार में हैं। अब देखना होगा कि 14 नवंबर को क्या भोपाल नगर निगम का बुलडोजर चलेगा या जनता के इस भारी आक्रोश के आगे प्रशासन को झुकना पड़ेगा?

