महाराष्ट्र 16 जनवरी : Election Results 2026: इन शहरों में कौन आगे? कौन पीछे?
महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों की मतगणना जारी है। शुरुआती रुझानों में अलग-अलग शहरों में अलग-अलग दल आगे चल रहे हैं।
मुंबई: भाजपा आगे
पुणे: भाजपा आगे
कल्याण-डोंबिवली: शिंदे गुट की शिवसेना आगे
ठाणे: शिंदे गुट की शिवसेना आगे
नवी मुंबई: भाजपा आगे
मीरा-भायंदर: भाजपा आगे
उल्हासनगर: भाजपा आगे
वसई-विरार: भाजपा आगे
भिवंडी: कांग्रेस आगे
पनवेल: भाजपा आगे
नागपुर: भाजपा आगे
पिंपरी-चिंचवड़: भाजपा आगे
नासिक: भाजपा आगे
छत्रपति संभाजी नगर: भाजपा आगे
कोल्हापुर: कांग्रेस आगे
सांगली-मिरज-कुपवाड़: भाजपा आगे
सोलापुर: भाजपा आगे
मालेगांव: शिंदे गुट की शिवसेना आगे
अहिल्यानगर: एनसीपी (अजित पवार गुट) आगे
जलगांव: भाजपा और शिंदे गुट की शिवसेना आगे
धुले: भाजपा आगे
इचलकरंजी: भाजपा आगे
नांदेड़: भाजपा आगे
परभणी: मतगणना जारी
जालना: भाजपा आगे
लातूर: कांग्रेस आगे
अमरावती: भाजपा आगे, कांग्रेस से कड़ा मुकाबला
अकोला: भाजपा आगे
चंद्रपुर: कांग्रेस आगे
BMC Election Results 2026: AIMIM ने जीती पहली सीट
महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव में AIMIM ने मुंबई की बीएमसी में पहली बार सीट जीत ली है। पार्टी की उम्मीदवार मेहजबीन खान ने वॉर्ड नंबर 134 से जीत दर्ज की। यह AIMIM के लिए बीएमसी चुनाव में पहली जीत मानी जा रही है।
BMC Election Results 2026: रामदास आठवले का दावा- महायुति से होगा मुंबई का मराठी मेयर
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा है कि मुंबई का अगला मेयर महायुति गठबंधन से होगा और वह मराठी भाषी होगा। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे 25–30 साल तक सत्ता में इसलिए रहे क्योंकि वह भाजपा के साथ गठबंधन में थे। आठवले ने बताया कि उनकी पार्टी आरपीआई (ए) साल 2012 से उद्धव ठाकरे के साथ थी, इसी वजह से वह सत्ता में बने रहे। लेकिन अब न तो बीजेपी और न ही आरपीआई (ए) उनके साथ है।
रामदास आठवले ने यह भी कहा कि अब उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे के साथ गठबंधन किया है, जिससे कुछ मराठी इलाकों में उन्हें फायदा मिल सकता है, लेकिन ज्यादातर सीटें महायुति गठबंधन को ही मिलेंगी। उन्होंने दोहराया कि मुंबई का मेयर महायुति से ही बनेगा और वह मराठी बोलने वाला होगा।
फोन कंपनियों के ऐप से कैमरे और माइक्रोफोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की योजना तैयार है। 12 महीने तक फोन का डाटा सुरक्षित करने की तैयारी। 75 करोड़ स्मार्टफोन का प्रयोग अकेले भारत में होता है। 83 तरह के सुरक्षा मानक से जुड़े बिंदु प्रस्ताव में शामिल
दिल्ली 12 जनवरी : फोन कंपनियों के ऐप से कैमरे और माइक्रोफोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की योजना तैयार है। भारत सरकार साइबर अपराध से निपटने के लिए फोन निर्माताओं पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। नए संचार सुरक्षा मानदंडों से जुड़े प्रस्तावित गोपनीय दस्तावेजों के अनुसार इसके तहत फोन कंपनियों को सोर्स कोड ‘प्रोग्रामिंग’ से जुड़ी जानकारी देनी होगी जिससे फोन चलता है। प्रोग्राम का भारत स्थित लैब में विश्लेषण होगा और जरूरत पड़ने पर उसकी जांच भी होगी।
संचार सुरक्षा प्रस्ताव में सरकार ने कंपनियों को
सॉफ्टवेयर में भी बदलाव की बात कही है जिसके जरिए फोन में पहले से अनिवार्य रूप से इंस्टॉल ऐप को हटाया जा सके। इसके अलावा ऐप द्वारा फोन के कैमरे और माइक्रोफोन के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए जिससे इन दोनों तकनीकों का गलत इस्तेमाल नहीं हो सके। प्रस्ताव के अनुसार कंपनियों को किसी भी सॉफ्टवेयर अपडेट और सुरक्षा जांच की पूरी जानकारी नेशनल सेंटर फॉर कम्युनिकेशन सिक्योरिटी को देनी होगी।
कानूनी तौर पर लागू करना चाहती है सरकार
साइबर खतरों से निपटने के लिए समय- समय पर फोन में ऑटोमेटिक मालवेयर स्कैनिंग होगी। सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव का मसौदा 2023 में तैयार कर लिया था, लेकिन अब सरकार इसे कानूनी तौर पर लागू करना चाहती है।
इसको लेकर मंगलवार को सूचना एवं प्रौद्योगिकी
मंत्रालय टेक कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सकता है। सरकार ने सुरक्षा मानकों के तहत 83 तरह के मानदंड तैयार किए हैं जिसका कंपनियों ने विरोध किया है।
प्रस्ताव के आठ उद्देश्य
1.फोन में समय-समय पर ऑटोमेटिक मालवेयर स्कैनिंग होगी
2.फोन कंपनियां सरकार को अपडेट की पूरी जानकारी देंगी
3.अपडेट- सुरक्षा तकनीक को लॉन्च करने से पहले बताना होगा
4.केंद्र सरकार कभी इन तकनीकों का परीक्षण कर सकती है
5.फोन से जुड़ी गतिविधियों का डाटा एक साल तक सुरक्षित
6.डिवाइस को नियमित ऐप परमिशन से जुड़ी चेतावनी देनी होगी
7.छेड़छाड़ की स्थिति में सुधार को लेकर पूरी चेतावनी देनी होगी
8 सॉफ्टवेयर का पुराना वर्जन किसी हाल में इंस्टॉल नहीं कर सकते
लोगों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता
योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके तहत साइबर सुरक्षा चक्र को मजबूत बनाने के साथ लोगों की व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित करना है। भारत दुनिया का दूसरा बड़ा स्मार्ट फोन बाजार है जहां 75 करोड़ स्मार्टफोन का प्रयोग होता है।
सूचना एवं प्रौद्योगिकी सचिव एस कृष्णन ने कहा है कि इस प्रस्ताव को लेकर कंपनियों का जो भी सुझाव या पक्ष होगा उसपर खुले मन से विचार होगा। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि प्रक्रिया प्रारंभिक स्तर पर है, विस्तार से कुछ भी नहीं कह सकते।
कंपनियां: सोर्स कोड का विश्लेषण संभव नहीं
स्मार्ट फोन निर्माताओं ने कहा कि वे सोर्स कोड की सुरक्षा बहुत गंभीरता से करते हैं। ऐप्पल ने वर्ष 2014 से 2016 के बीच चीन द्वारा सोर्स कोड की मांग को कई बार ठुकरा दिया है। अमेरिकी कानूनी एजेंसियों ने भी कई बार सोर्स कोड जानने की कोशिश की लेकिन वे अफसल रहे।
भारत के मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन फॉर इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (एमएआईटी) ने कहा है कि गोपनीयता और निजता के कारण ये संभव नहीं है। सूत्रों की मानें तो एमएआईटी ने पिछले सप्ताह सरकार से इस प्रस्ताव को खत्म करने को भी कहा है।
पहले भी हुई सख्ती की कोशिश
केंद्र सरकार ने पिछले साल भी लोगों के डिजिटल सुरक्षा चक्र को मजबूत बनाने के लिए संचार साथी ऐप को अनिवार्य रूप से फोन में इंस्टॉल करने का निर्देश दिया था। हालांकि कंपनियों और विपक्ष के विरोध के चलते इस फैसले को सरकार ने वापस लेते हुए कहा था कि ये लोगों की इच्छा पर होगा कि वे ऐप इंस्टॉल करते हैं या नहीं।
दिसंबर तक देश भर में संचार साथी ऐप को कुल 1.4 करोड़ डाउनलोड हो चुके हैं। सरकार ने कहा था कि इस ऐप से लोगों से जुड़ी गोपनीय जानकारी को कड़ी सुरक्षा मिलेगी।
नियमित अपडेट से बैटरी पर असर
एमएआईटी द्वारा सरकार को दिए गए दस्तावेज में उसने कहा है कि नियमित मालवेयर स्कैनिंग से फोन की बैटरी बहुत जल्दी-जल्दी खत्म होगी। सॉफ्टवेयर में किसी तरह का अपडेट करने के लिए सरकार से अनुमति लेनी होगी जो अव्यावहारिक है, क्योंकि अपडेट तत्काल जारी होते हैं।
एमएआईटी ने कहा है कि इसके अलावा सरकार चाहती है कि एक साल का फोन लॉग डाटा सुरक्षित रहे। स्पष्ट है कि फोन में इतना स्पेस नहीं होता है जिससे ऐसा हो सके। ऐसे में इस तरह के नियमों से सिर्फ समस्याओं में ही इजाफा होगा।
कंपनियों ने दिया दुनिया का हवाला
भारत सरकार के प्रस्ताव को लेकर कंपनियों ने कहा है कि दुनिया भर के किसी देश ने ऐसा नियम नहीं बनाया है। दिसंबर में एप्पल, सैमसंग, गूगल और शियोमी ने भारत सरकार के अधिकारियों के साथ हुई बैठक से जुड़े दस्तावेजों से ये जानकारी सामने आई है।
काउंटर पॉइंट रिसर्च के अनुसार सैमसंग और शियोमी अपने फोन में गूगल के ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रायड का प्रयोग करती हैं। भारत में सैमसंग का 19 जबकि शियोमी का 15 फीसदी कब्जा है। वहीं एप्पल की हिस्सेदारी करीब पांच फीसदी है।
दिल्ली 9 जनवरी : दिल्ली में भाजपा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ईडी की छापेमारी के खिलाफ टीएमसी के विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधा। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ममता बनर्जी बंगाल में कोई जांच नहीं होने देती हैं। उन्होंने सीएम ममता पर ईडी के अधिकारियों को धमकाने का भी आरोप लगाया। चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में गुरुवार से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के बाद सियासी घमासान मचा हुआ है। राजनीतिक परामर्श फर्म आईपैक (I-PAC) के कोलकाता स्थित घर और ऑफिस पर छापेमारी के बाद टीएमसी केंद्र की भाजपा सरकार पर हमलावर हैं। ऐसे में शुक्रवार को राजधानी दिल्ली और बंगाल में टीएमसी कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर मोर्चा खोला। अब टीएमसी के प्रदर्शन पर दिल्ली में आयोजित भाजपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में रविशंकर प्रसाद ने ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को घेरा है।
ममता बनर्जी बंगाल में कोई जांच नहीं होने देती-भाजपा
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा, 'बंगाल में जो हुआ, वह आजाद भारत में पहले कभी नहीं हुआ। सीएम ममता बनर्जी का पूरा काम न सिर्फ अनैतिक, गैर-जिम्मेदाराना और असंवैधानिक है, बल्कि उन्होंने पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को शर्मसार कर दिया है।' भाजपा ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी बंगाल में कोई जांच नहीं होने देती हैं। ममता बनर्जी पर ईडी के अधिकारियों को भी धमकाने का आरोप लगाया।
दिल्ली 9 जनवरी : जमीन के बदले नौकरी से जुड़े कथित घोटाले में कोर्ट के इस फैसले से लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सीबीआई की चार्जशीट में नामित 103 आरोपियों में से पांच की मृत्यु हो चुकी हैजमीन के बदले नौकरी से जुड़े कथित घोटाले के मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती, बेटे तेजस्वी यादव सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था।
41 लोगों के खिलाफ आरोप तय, 52 हुए बरी
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि पूर्व रेल मंत्री लालू यादव ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। इस दौरान उन्होंने आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया। यादव परिवार ने रेल अधिकारियों और अपने करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से जमीनें हासिल की। अदालत ने इस मामले में 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए और 52 लोगों को बरी कर दिया, जिनमें रेल अधिकारी भी शामिल थे। सीबीआई की चार्जशीट में नामित 103 आरोपियों में से पांच की मृत्यु हो चुकी है। अधिवक्ता अजाज अहमद ने कहा, "सीबीआई अदालत ने लालू प्रसाद यादव, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और हेमा यादव के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 120बी और 13 के तहत आरोप तय किए हैं। आरोप 29 जनवरी को तय किए जाएंगे।'
कुलदीप सेंगर हमें 5 हजार किमी दूर से मरवा देगा- रेप विक्टिम बोली- उसकी बेटी CBI अफसर से मिली, बृजभूषण ने सस्पेंड कराई सजा
उन्नाव 27 दिसंबर : ‘5 किमी क्या, 5 हजार किमी भी उसके लिए कुछ नहीं है। वो हमें कहीं भी मरवा सकता है। मेरे लिए जिंदगी भर का खतरा है। उसके मरने के बाद भी खतरा रहेगा, क्योंकि उसके लोगों को मेरा चेहरा याद रहेगा कि इसी लड़की ने हमारे विधायक को जेल भिजवाया था।’
उन्नाव रेप केस की विक्टिम ये बात कहते हुए भावुक हो जाती हैं। 23 दिसंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने इस केस में BJP के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा सस्पेंड कर दी। सेंगर को उम्रकैद की सजा मिली है। कोर्ट ने जमानत देते हुए ये शर्त रखी कि कुलदीप सेंगर को विक्टिम से 5 किमी दूर रहना होगा। विक्टिम का कहना है कि इस फैसले ने हमारी उम्मीदें तोड़ दी हैं।
कोर्ट के फैसले के बाद दैनिक भास्कर ने विक्टिम और उनकी मां से बात की। उन्होंने CBI और BJP नेता बृजभूषण शरण सिंह पर सेंगर की मदद करने का आरोप लगाया। हमने विक्टिम के वकील और कानून के जानकारों से भी समझा कि कुलदीप सेंगर की सजा सस्पेंड होने के क्या मायने हैं।
हालांकि, सजा सस्पेंड होने के बावजूद कुलदीप सेंगर को जेल में रहना होगा क्योंकि 2020 में विक्टिम के पिता की हत्या में 10 साल की सजा मिली हुई है। इस फैसले के खिलाफ भी कुलदीप सेंगर ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की है।
‘लोग धमकी देकर जाते हैं कि ज्यादा दिन दुनिया में नहीं रहोगी’
विक्टिम के साथ 4 जून, 2017 को रेप हुआ था। आरोप विधायक कुलदीप सेंगर पर था, इसलिए मामला सुर्खियों में आ गया। विक्टिम ने पुलिस स्टेशन में सुनवाई न होने पर मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह की कोशिश की थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट के दखल के बाद कुलदीप सेंगर को 13 अप्रैल 2018 में गिरफ्तार किया गया।विक्टिम और उनका परिवार दिल्ली में रह रहा है। उनकी सिक्योरिटी में CRPF के 9 जवान तैनात रहते हैं। विक्टिम कहती हैं, 'कोर्ट के फैसले से बहन-बेटियों की हिम्मत कमजोर हो गई है। मेरे साथ अन्याय हो रहा है। जज मुझसे बोलते थे कि आप कुछ नहीं बोल सकतीं। आपके वकील बोलेंगे। मेरा ही केस, मेरे साथ रेप हुआ और मुझे ही बोलने से रोका गया।’
विक्टिम का दावा है कि उन्हें आज भी धमकियां मिलती हैं। वे कहती हैं, ‘लोग बगल से निकलते हुए बोलते हैं कि ज्यादा दिन तक दुनिया में रह नहीं पाओगी। ऐसे बोलते हैं कि CRPF वाले भी नहीं समझ पाते। पता नहीं, कब मुझे मार दिया जाएगा।’
‘CBI ठीक से बहस करती तो जमानत नहीं मिलती’
कोर्ट के फैसले के बाद विक्टिम ने अपनी मां और महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना के साथ इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया था। इस पर वे कहती हैं, ‘मैं धरना देने गई थी। मुझे बोला गया कि इसकी परमिशन नहीं है। तो क्या रेप करने की परमिशन है, क्या बहन-बेटियों को छेड़ने की परमिशन है।’
क्रिसमस पर कैथेड्रल चर्च पहुंचे PM मोदी, ईसा मसीह की प्रतिमा के सामने जोड़े हाथ; बिशप ने प्रधानमंत्री के लिए विशेष प्रार्थना की।
दिल्ली 25 दिसंबर : क्रिसमस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सुबह दिल्ली के कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्पशन पहुंचे। यहां वह ईसाई समुदाय के साथ प्रार्थना में शामिल हुए। इसमें दिल्ली और उत्तर भारत के ईसाई समुदाय के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। वहीं, दिल्ली के बिशप रेव्ह डॉ. पॉल स्वरूप ने पीएम मोदी के लिए विशेष प्रार्थना की। पीएम मोदी ने X पर एक पोस्ट में कहा, "दिल्ली में कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्पशन में क्रिसमस की सुबह की प्रार्थना में हिस्सा लिया। इस प्रार्थना सभा में प्रेम, शांति और करुणा का शाश्वत संदेश झलका। क्रिसमस की भावना हमारे समाज में सद्भाव और सद्भावना को प्रेरित करे।"
देशवासियों को दीं शुभकामनाएं
इससे पहले उन्होंने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और आशा व्यक्त की कि ईसा मसीह की शिक्षाएं समाज में सद्भाव को और मजबूत करती रहेंगी। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ‘‘शांति, करुणा और आशा से भरे आनंदमय क्रिसमस की सभी को शुभकामनाएं। ईसा मसीह की शिक्षाएं हमारे समाज में सद्भाव को सुदृढ़ करें।’’
ईसाई समुदाय से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहे हैं PM मोदी
बता दें कि पिछले कुछ सालों से, पीएम मोदी नियमित रूप से ईसाई समुदाय से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। 2023 में ईस्टर के दौरान, उन्होंने दिल्ली के सेक्रेड हार्ट कैथेड्रल में एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। 2023 में क्रिसमस पर, उन्होंने दिल्ली में अपने आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर एक कार्यक्रम की मेजबानी की थी। 2024 में, उन्होंने मंत्री जॉर्ज कुरियन के आवास पर एक डिनर में और कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। सूत्रों ने बताया कि यह समुदाय के साथ उनके नियमित जुड़ाव को दर्शाता है।
अलग-अलग भीषण हादसे, आपस में टकराए 20 वाहन; एक की मौत, पांच लोग घायल
दिल्ली 15 दिसंबर : घने कोहरे ने सोमवार सुबह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर कहर बरपा दिया। कोहरे के चलते हुए दो अलग-अलग भीषण सड़क हादसों में करीब 20 वाहन आपस में टकरा गए। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार इन हादसों में एक सीआईएसएफ इंस्पेक्टर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि करीब पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मृतक को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है जिसकी अभी पहचान नहीं हो पाई है। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, वहीं घायलों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। पहला हादसा सुबह करीब पांच बजे नरियाला गांव के समीप हुआ, जहां घने कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम थी। यहां दस छोटे वाहन और तीन बड़े वाहन आपस में टकरा गए। दूसरा हादसा बनारसी गांव के पास हुआ, जिसमें सात वाहन एक-दूसरे से भिड़ गए। बताया जा रहा है कि अमरूदों से भरा एक ट्रक पहले एक वाहन से टकराया, जिसके बाद ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया। कोहरे के कारण पीछे से आ रहे वाहन समय पर ब्रेक नहीं लगा सके और एक के बाद एक टकराते चले गए। हादसे के बाद मौके पर स्थानीय ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाते हुए घायलों को निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचाया। ग्रामीणों का आरोप है कि एम्बुलेंस को सूचना देने के बावजूद आधे घंटे से अधिक समय तक कोई एम्बुलेंस मौके पर नहीं पहुंची, जिससे गंभीर रूप से घायल सीआईएसएफ इंस्पेक्टर ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया। फिलहाल पुलिस मौके पर पहुंचकर हादसों की जांच में जुटी हुई है और एक्सप्रेस-वे पर यातायात को नियंत्रित किया जा रहा है।
भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन में से एक इंडिगो इस समय अपने सबसे गंभीर ऑपरेशनल दिक्कतों में से गुजर रही है। इसी बीच मंगलवार और बुधवार को देश के कई बड़े एयरपोर्ट पर 200 से ज्यादा फ़्लाइट कैंसिल हो गईं और सैकड़ों देर से चलीं। इस दिक्कत की वजह से हजारों पैसेंजर फंसे रहे।
इस दौरान टर्मिनल पर लंबी कतारें लग गईं। एयरलाइन्स पर यह सवाल भी उठने लगे कि अचानक शेड्यूल में क्या गड़बड़ हुई? रिपोर्ट्स के मुताबिक इंडिगो की फ्लाइट्स में देरी की वजह क्रू की कमी, नए ड्यूटी-टाइम नियम, खास एयरपोर्ट पर टेक्निकल खराबी और सर्दियों के पीक ऑपरेशन के दौरान भारी भीड़ शामिल हैं। आइये विस्तार से समझते है क्या है पूरी समस्या?
1. क्रू की बहुत भीषण कमी
नवंबर से लागू नए ड्यूटी-टाइम नियम के बाद से इंडिगो पायलटों और केबिन क्रू की भीषण कमी से जूझ रहा है। अपडेटेड नियमों ने पायलटों के उड़ान भरने के घंटों की संख्या में भारी कमी कर दी और जरूरी आराम की जरूरतें बढ़ा दीं हैं।इंडिगो की कई फ़्लाइटें सिर्फ इसलिए नहीं निकल पाईं क्योंकि उन्हें चलाने के लिए कोई कानूनी तौर पर क्रू मौजूद नहीं था। कई एविएशन सोर्स ने कहा कि एयरलाइन एक ऐसे पॉइंट पर पहुंच गई थी जहां पूरे रोटेशन कैंसिल करने पड़े क्योंकि पहले रोस्टर में शामिल पायलट अब बदली हुई लिमिट के तहत उड़ान भरने के लायक नहीं थे।
2. नया रोस्टर नियम (FDTL नॉर्म्स) बना परेशानी का सबब
भारत में फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) का नया फेज थकान कम करने और सुरक्षा बेहतर करने के लिए बनाया गया है। इंडिगो, जो एशिया के सबसे बड़े नेटवर्क में से एक है, जिसमें रोज़ाना 2,200 से ज्यादा फ्लाइट शामिल है उसे समय पर रोस्टर फिर से बनाने में मुश्किल आ रही है।नए नॉर्म्स के लिए ड्यूटी शेड्यूल, नाइट-लैंडिंग प्लान और हफ्ते के रेस्ट चार्ट में बड़े बदलाव करने पड़े। एयरलाइन के शेड्यूलिंग सिस्टम पूरी तरह से स्थिर नहीं हुए थे, और नई जरूरतों की वजह से ज्यादा भीड़ वाले रूट पर क्रू की अचानक कमी हो गई।
3. बड़े एयरपोर्ट पर तकनीकी खामियां
मंगलवार को, दिल्ली और पुणे समेत कई एयरपोर्ट पर चेक-इन और डिपार्चर कंट्रोल सिस्टम में खराबी की खबर आई, जिससे इंडिगो के कई रोटेशन में लंबी लाइनें लग गईं।इस समस्या की वजहसे डिपार्चर में देरी हुई। दिन भर में देरी तेजी से बढ़ती गई, जिससे एयरक्राफ्ट और क्रू के आने-जाने की चेन बिगड़ गई।
4. एयरपोर्ट पर भीड़ और सर्दियों में ट्रैफिक बनी समस्या
यात्रियों की ज्यादा संख्या, सर्दियों में कोहरे की वजह से ऑपरेशन पर दबाव, और बड़े मेट्रो एयरपोर्ट पर पीक-ऑवर में भीड़ ने इंडिगो देरी को वापस पाने की क्षमता को और कम कर दिया। अपने व्यस्त शेड्यूल के कारण, छोटी-मोटी देरी का भी उसके पूरे नेटवर्क पर असर पड़ता था।इंडिगो की वेबसाइट बताती है कि एयरलाइन रोजाना 2,200 से ज्यादा उड़ाने संचालित करती है। मंगलवार के सरकारी डेटा से पता चला कि इसका ऑन-टाइम परफॉर्मेंस गिरकर सिर्फ 35 परसेंट रह गया था। इसका मतलब है कि एक ही दिन में 1,400 से ज्यादा उड़ानों में देरी हुई।
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के अनुसार, नवंबर महीने में कुल 1,232 फ़्लाइट्स कैंसिल हुईं।
नए रोस्टर नियम में क्या हैं?
भारत के सिविल एविएशन रेगुलेटर ने क्रू की थकान कम करके सुरक्षा को बेहतर बनाने के मकसद से FDTL के कड़े नियम लागू किए हैं। आइये जानते हैं इन बदलावों में क्या-क्या शामिल हैं?1. हफ्ते में अधिक आराम की जरूरत
पायलटों को अब हर सप्ताह में अधिक आराम का समय मिलना चाहिए। इससे वे कानूनी तौर पर लगातार कितनी ड्यूटी कर सकते हैं, इसकी संख्या कम हो जाती है और रोस्टर प्लानिंग पर असर पड़ता है।2. रात में लैंडिंग पर रोक
एक पायलट एक तय समय में जितनी रात में लैंडिंग कर सकता है, उसकी संख्या छह से घटाकर दो कर दी गई है। जो एयरलाइंस रात के समय के ऑपरेशन पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं, उन पर इसका काफी असर पड़ा है।3. कम किए गये ड्यूटी के घंटे
नियमों में लगातार ड्यूटी के समय पर ज्यादा सख्ती की गई है, जिसका मतलब है कि एक ही शेड्यूल पर ज्यादा पायलटों को काम करना होगा।DGCA ने उड़ान के समय की लिमिट तय की है:
हर दिन 8 घंटे
हर सप्ताह 35 घंटे
हर महीने 125 घंटे
हर साल 1,000 घंटे
नियम के मुताबिक क्रू को अपनी फ़्लाइट ड्यूटी के समय के दोगुने के बराबर आराम का समय भी मिलना चाहिए। जिसमें 24 घंटे के समय में कम से कम 10 घंटे का आराम शामिल है।नियम सुरक्षा में सुधार करते हैं लेकिन एयरलाइंस, खासकर जिनके पास फ़ास्ट-टर्नअराउंड मॉडल हैं, उन्हें हर प्लेन में ज्यादा पायलट तैनात करने की जरूरत होती है। इंडिगो का बड़ा ओवरनाइट नेटवर्क इस बदलाव से खास तौर पर कमज़ोर था।
दूसरी एयरलाइंस पर ऐसा असर क्यों नहीं पड़ता? हालांकि नए नियम सभी एयरलाइन पर लागू होते हैं, लेकिन इंडिगो में सबसे ज़्यादा दिक्कत कई स्ट्रक्चरल वजहों से है। आइये जानते हैं क्यों?
1. स्केल और फ्रिक्वेंसी
इंडिगो भारत की ज़्यादातर डोमेस्टिक फ़्लाइट्स ऑपरेट करता है। इतने ज़्यादा वॉल्यूम के साथ, एक छोटी सी दिक्कत भी पूरे देश में बड़ा असर डालती है।2. बड़ा नाइट-टाइम नेटवर्क
जहां एयर इंडिया, विस्तारा और अकासा जैसी एयरलाइनें रात में कम सेक्टर ऑपरेट करती हैं, वहीं इंडिगो कई हाई-फ़्रीक्वेंसी ओवरनाइट सर्विस चलाती है। नाइट लैंडिंग पर लिमिट ने तेज़ी से कम कर दिया कि एक क्रू पेयरिंग कानूनी तौर पर कितनी फ़्लाइट ऑपरेट कर सकती है।3. टाइट क्रू यूटिलाइजेशन मॉडल
इंडिगो की नेटवर्क एफ़िशिएंसी क्रू के घंटों को ज़्यादा से ज़्यादा करने और डाउनटाइम को कम से कम करने पर निर्भर करती है। एक बार जब ड्यूटी-टाइम लिमिट टाइट हो गईं, तो लगभग तुरंत गैप खुल गए।4. नेटवर्क रीअलाइनमेंट में कम फ़्लेक्सिबिलिटी
छोटे नेटवर्क वाली एयरलाइनों को शेड्यूल एडजस्ट करना आसान लगा। इंडिगो के कनेक्शन के बड़े मैट्रिक्स ने पायलटों और केबिन क्रू को जल्दी से रीशफ़ल करना मुश्किल बना दिया।कब सुधरेंगे हालात?
इंडिगो का कहना है कि वह 'कैलिब्रेटेड एडजस्टमेंट' करने की कोशिश की जा रही है और उम्मीद है कि लगभग 48 घंटों में ऑपरेशन स्टेबल हो जाएगा।एयरलाइन ज्यादा स्ट्रेस वाले रूट पर क्रू को फिर से तैनात कर रही है, रात के शेड्यूल में बदलाव कर रही है साथ ही आखिरी समय में अफरा-तफरी से बचने के लिए पहले से प्लान किए गए कैंसलेशन कर रही है।
इंडिगो ने एक बयान में कहा, 'हम अपने कस्टमर्स से सच में माफी मांगते हैं। कई अचानक आई ऑपरेशनल मुश्किलों, जिनमें छोटी-मोटी टेक्नोलॉजी की गड़बड़ियां, सर्दियों के मौसम से जुड़े शेड्यूल में बदलाव, खराब मौसम, एविएशन सिस्टम में बढ़ी भीड़ और अपडेटेड क्रू रोस्टरिंग नियमों को लागू करना शामिल है, का हमारे ऑपरेशन पर बुरा असर पड़ा है।'
दिल्ली 29 नवम्बर : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार यानी 25 नवंबर को एक मामले की सुनवाई करते हुए हिरासत में हिंसा और मौतों को सिस्टम पर धब्बा बताया है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा, "अब यह देश इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। यह सिस्टम पर धब्बा है। हिरासत में मौतें नहीं हो सकतीं."
शीर्ष अदालत पूरे भारत के पुलिस स्टेशनों में काम न कर रहे सीसीटीवी कैमरों के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही थी।
4 सितंबर को दिए गए अपने आदेश का हवाला देते हुए बेंच ने कहा कि राजस्थान में आठ महीनों में 11 हिरासत में हुई मौतों की रिपोर्ट सामने आई है। कोर्ट ने कहा कि इससे साफ़ है कि हिरासत में अत्याचार कम होने के बजाय जारी हैं।
कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र की ओर से थानों में सीसीटीवी को लेकर मांगी गई रिपोर्ट न सौंपने पर कड़ी नाराज़गी जताई।
अब तक सिर्फ 11 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ही अपनी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल कर पाए हैं। केंद्र सरकार ने एक भी रिपोर्ट जमा नहीं की है।
बार एंड बेंच के मुताबिक जस्टिस नाथ ने इस पर कड़ा एतराज़ जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार अदालत के आदेशों को हल्के में नहीं ले सकती।
उन्होंने पूछा, "केंद्र सरकार अदालत को बहुत हल्के में ले रही है। क्यों?"
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार अदालत के आदेशों को हल्के में बिल्कुल नहीं ले रही है और वह जल्द ही हलफ़नामा दाख़िल करेगी।
उन्होंने कहा कि हिरासत में मौतों को किसी भी तरह से जायज़ नहीं ठहराया जा सकता।
न्यूज़ वेबसाइट द हिंदू के मुताबिक इस पर जस्टिस मेहता ने उन्हें रोका और कहा कि अभी अदालत को हलफ़नामा नहीं, बल्कि पूरी अनुपालन रिपोर्ट चाहिए कि सरकार ने क्या-क्या किया है।
कोर्ट ने राजस्थान में आठ महीनों में हिरासत में हुई 11 मौतों का जिक्र करते हुए कहा कि अब देश ऐसी घटनाओं को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा।
द हिंदू के मुताबिक तुषार मेहता ने यह भी कहा कि पुलिस स्टेशनों के बाहर सीसीटीवी लगाना कुछ मामलों में सुरक्षा के लिहाज़ से समस्या पैदा कर सकता है।
जस्टिस मेहता ने जवाब दिया कि अमेरिका में तो पुलिस स्टेशनों की लाइव-स्ट्रीमिंग तक होती है। इस पर मेहता ने कहा कि अमेरिका में 'प्राइवेट रिसॉर्ट जैसी जेलें' भी हैं।
अदालत ने कहा कि जेलों में भीड़ कम करने और खर्च घटाने के लिए 'ओपन जेल' जैसे विकल्पों पर काम होना चाहिए।
आखिर में बेंच ने कहा कि अगर 16 दिसंबर तक रिपोर्ट नहीं आई तो संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव और केंद्रीय एजेंसियों के निदेशकों को कोर्ट में खुद पेश होना पड़ेगा और देरी की वजह बतानी होगी।
2 दिसंबर 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया था।
कोर्ट ने कहा था कि हर पुलिस स्टेशन और सीबीआई, ईडी, एनआईए जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों के दफ़्तरों में नाइट विज़न वाले सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। यह आदेश जस्टिस आर.एफ. नरीमन की अगुवाई वाली बेंच ने दिया था।
कोर्ट ने साफ़ कहा था कि जिन भी एजेंसियों के पास पूछताछ और गिरफ्तारी की शक्ति है, उन सभी के दफ़्तरों में भी सीसीटीवी लगने चाहिए।
निर्देश के मुताबिक ये कैमरे ऐसी तकनीक वाले होने चाहिए कि वे रात में भी रिकॉर्ड कर सकें और इनमें ऑडियो और वीडियो दोनों की सुविधा हो।
कोर्ट ने पुलिस स्टेशन के एसएचओ को इन कैमरों की सही मेंटेनेंस और रिकॉर्डिंग संभालने की ज़िम्मेदारी दी थी।
साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और ज़िला स्तर पर निगरानी के लिए ओवरसाइट कमेटियां बनाने का आदेश दिया था, ताकि यह देखा जा सके कि सीसीटीवी का सही इस्तेमाल हो रहा है या नहीं।
जहां बिजली या इंटरनेट उपलब्ध नहीं है, वहाँ भी सरकारों को तुरंत व्यवस्था करने को कहा गया था. कोर्ट का कहना था कि चाहे इसके लिए सोलर पावर का ही इस्तेमाल क्यों न करना पड़े।
यह आदेश उस मामले के बाद आया था जिसमें पंजाब में पुलिस हिरासत में यातना की शिकायत सामने आई थी. इसलिए कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सीसीटीवी फुटेज डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर या नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर में सुरक्षित रूप से रखा जाए और कम से कम 18 महीनों तक सुरक्षित रहे।
कोर्ट का कहना था कि अगर बाज़ार में ऐसा उपकरण उपलब्ध न हो जो 18 महीने का डेटा रख सके, तो सरकार को सबसे लंबी रिकॉर्डिंग अवधि वाले उपकरण खरीदने होंगे।
सरल शब्दों में कहें तो पुलिस हिरासत में किसी अभियुक्त की मौत को 'हिरासत में मौत' का मामला माना जाता है। चाहे वह अभियुक्त रिमांड पर हो या नहीं हो, उसे हिरासत में लिया गया हो या केवल पूछताछ के लिए बुलाया गया हो।
उस पर कोई मामला अदालत में लंबित हो या वह सुनवाई की प्रतीक्षा कर रहा हो, पुलिस की हिरासत के दौरान अभियुक्त की मौत हो तो उसे 'हिरासत में मौत' माना जाता है।
इसमें पुलिस हिरासत के दौरान आत्महत्या, बीमारी के कारण हुई मौत, हिरासत में लिए जाने के दौरान घायल होने एवं इलाज के दौरान मौत या अपराध कबूल करवाने के लिए पूछताछ के दौरान पिटाई से हुई मौत शामिल है।
पुलिस हिरासत में उत्पीड़न और मौत के मामलों का ज़िक्र भारत के मुख्य न्यायाधीश एन. वी रमन्ना ने भी किया है।
अगस्त, 2021 में उन्होंने एक संबोधन में कहा, "संवैधानिक रक्षा कवच के बावजूद अब भी पुलिस हिरासत में शोषण, उत्पीड़न और मौत होती है। इसके चलते पुलिस स्टेशनों में ही मानवाधिकार उल्लंघन की आशंका बढ़ जाती है। "
उन्होंने यह भी कहा, "पुलिस जब किसी को हिरासत में लेती है तो उस व्यक्ति को तत्काल क़ानूनी मदद नहीं मिलती है। गिरफ़्तारी के बाद पहले घंटे में ही अभियुक्त को लगने लगता है कि आगे क्या होगा?"
सुप्रीम कोर्ट ने 1996 में डीके बसु बनाम बंगाल और अशोक जौहरी बनाम उत्तर प्रदेश मामले में फ़ैसला सुनाते हुए कहा था कि हिरासत में मौत या पुलिस की बर्बरता "क़ानून शासित सरकारों में सबसे ख़राब अपराध" हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद हिरासत में हुई मौतों का विवरण दर्ज करने के साथ-साथ संबंधित लोगों को इसकी जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया।
खबर बीबीसी के आधार पर।
दिल्ली ब्लास्ट 27 नवम्बर : महाराष्ट्र के एक फाइव स्टार होटल में फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर करीब छह महीने तक रहने वाली महिला को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। धमाके के समय वह दिल्ली में मौजूद थीं।
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार एक महिला से दिल्ली में लाल किले के पास हाल ही में हुए ब्लास्ट के संबंध में पूछताछ की जा रही है। पुलिस का दावा है कि महिला फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर संभाजीनगर के एक लग्जरी होटल में पिछले छह महीनों से ठहरी थी। शुरुआती जांच में पता चला है कि उसका पाकिस्तानी सेना और अफगानिस्तान में मौजूद व्यक्तियों से संबंध है।
पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपी महिला अपना नाम कल्पना भागवत (Kalpana Bhagwat) बता रही है, लेकिन उसके पहचान की पुष्टि अभी की जा रही है। दिल्ली धमाके के समय वह राजधानी में ही मौजूद थी। जिसके बाद जांच का मुख्य फोकस इस बात पर केंद्रित हो गया है कि क्या वह किसी भी तरह से दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ी हुई है। जिस होटल के कमरे से उसे गिरफ्तार किया गया था, उसकी तलाशी के दौरान पुलिस को 2017 का फर्जी आईएएस नियुक्ति पत्र, संदिग्ध आधार कार्ड और कई अहम दस्तावेज मिले।
शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि उसके बैंक खाते में अफगानिस्तान में मौजूद उसके कथित प्रेमी अशरफ खलील और पाकिस्तान में मौजूद उसके भाई अवेद खलील के खातों से बड़ी रकम भेजी गई थी। पुलिस ने उसके कमरे से 19 करोड़ रुपये का एक चेक और 6 लाख रुपये का दूसरा चेक भी बरामद किया।
महिला का पाकिस्तानी कनेक्शन
अदालत में पुलिस की ओर से बताया गया कि महिला के पास 10 अंतरराष्ट्रीय नंबर मिले, जिनमें अफगानिस्तान और पेशावर से जुड़े नंबर शामिल हैं। महिला के पास पाकिस्तान सेना के अधिकारियों और अफगानिस्तान दूतावास से जुड़े नंबर मिले है। उसके मोबाइल में एक नंबर ‘गृह मंत्री OSD’ के नाम से भी मिला। फोन में पाकिस्तान में मौजूद एक व्यक्ति के साथ व्हाट्सएप चैट भी डिलीट की गई थी।पिछले तीन दिनों से आईबी के दो अधिकारी महिला से पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि महिला की वास्तविक पहचान पता लगाई जा रही है। फिलहाल अदालत ने उसे 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
गौरतलब हो कि दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए कार धमाके में 15 लोगों की मौत हो गई थी और 12 से ज्यादा घायल हुए थे। इस मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस आतंकी हमले में शामिल सभी प्रमुख आरोपी मेडिकल बैकग्राउंड से जुड़े बताए गए हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि संभाजीनगर में पकड़ी गई महिला का इस पूरे नेटवर्क से कोई संबंध है या नहीं।
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